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Mantra

Mantra

Mantras are Vedic in origin. The teachings of the Vedas consist of various chants or hymns recognized by different seers or Sages from the Cosmic Mind. This ancient technique originates in India. The idea is that mantra is intrinsically related to sound. The mantra is sound, and the sound is echoing in everything in the universe. The sound has enormous power. In fact, it has the power to create an entire universe. According to ancient Indian belief, in the beginning, there was sound, which reverberated as Om (Aum), and from that sound, everything came into existence.

।। ब्रह्मार्पणं ।।
brahmārpaṇaṁ

ब्रह्मार्पणं ब्रह्म हविः ब्रह्माग्नौ ब्रह्मणा हुतम् ।
ब्रह्मैव तेन गन्तव्यं ब्रह्मकर्मसमाधिना ॥

अहम् वैश्वानरो भूत्वा प्राणीनाम् देहमाश्रितः |
प्राणापान समायुक्तः पचाम्यन्नम् चतुर्विदम् ||



अर्थात
जिस यज्ञमें अर्पण भी ब्रह्म है हवि भी ब्रह्म है और ब्रह्मरूप कर्ताके द्वारा ब्रह्मरूप अग्निमें आहुति देनारूप क्रिया भी ब्रह्म है (ऐसे यज्ञको करनेवाले) जिस मनुष्यकी ब्रह्ममें ही कर्मसमाधि हो गयी है उसके द्वारा प्राप्त
करनेयोग्य फल भी ब्रह्म ही है।
प्राणियोंके शरीरमें रहनेवाला मैं प्राणअपानसे युक्त वैश्वानर होकर चार प्रकारके अन्नको पचाता हूँ ।

Brahmārpañam Brahma Havir Brahmāgnau Brahmañāhutaṃ,
Brahmaiva Tena Gantavyam Brahmakarmā Samādhinah.
Aham Vaishvānaro Bhutvā Prāñinām Ḍehamāshritaha,
Prāñāpāna Samāyuktah Pachāmyannam Chaturvidham.


Word For Word Translation
brahmā: supreme spirit; arpañam: oblation, havih: butter, agnau: in the fire of consummation. brahmana: by the spirit soul. aahutam: offered. brahma: spiritual kingdom: eva: certainly. tena: by him. gantavyam: to be reached. brahma: spiritual. karma: in activities. samadhina: by complete absorption.
aham: I. vaisvanarah: My plenary portion as the digesting fire. bhutva: becoming. praninam: of all living entities. deham: in the bodies. asritah: situated. prana: the outgoing air. apana: the down-going air. samayuktah: keeping in balance. pachami: I digest. annam. foodstuff. catuh-vidham. the four kinds.

The two verses are from the Bhagavad Gita, Chapter IV, Verse 24 and Bhagavad Gita, Chapter XV, Verse 14.

।। महा मृत्‍युंजय मंत्र ।।
Maha Mritunjaya Mantra

|| ॐ त्र्यम्‍बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धन्म ||
|| उर्वारुकमिव बन्धनामृत्येर्मुक्षीय मामृतात् ||



||संपुटयुक्त महा मृत्‍युंजय मंत्र ||
ॐ हौं जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः ॐ त्र्यम्‍बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्‍धनान् मृत्‍योर्मुक्षीय मामृतात् ॐ स्वः भुवः भूः ॐ सः जूं हौं ॐ !!


||लघु मृत्‍युंजय मंत्र ||
ॐ जूं स माम् पालय पालय स: जूं ॐ। किसी दुसरे के लिए जप करना हो तो-ॐ जूं स (उस व्यक्ति का नाम जिसके लिए अनुष्ठान हो रहा हो) पालय पालय स: जूं ॐ


|| महा मृत्युंजय मंत्र का अक्षरशः अर्थ ||
त्रयंबकम = त्रि-नेत्रों वाला यजामहे = हम पूजते हैं, सम्मान करते हैं, हमारे श्रद्देय सुगंधिम= मीठी महक वाला, सुगंधित पुष्टि = एक सुपोषित स्थिति,फलने-फूलने वाली, समृद्ध जीवन की परिपूर्णता वर्धनम = वह जो पोषण करता है, शक्ति देता है,स्वास्थ्य, धन, सुख में वृद्धिकारक; जो हर्षित करता है, आनन्दित करता है, और स्वास्थ्य प्रदान करता है, एक अच्छा माली उर्वारुकम= ककड़ी इव= जैसे, इस तरह बंधना= तना मृत्युर = मृत्यु से मुक्षिया = हमें स्वतंत्र करें, मुक्ति दें मा= नअ मृतात= अमरता, मोक्ष


||महा मृत्‍युंजय मंत्र का अर्थ ||
समस्‍त संसार के पालनहार, तीन नेत्र वाले शिव की हम अराधना करते हैं। विश्‍व में सुरभि फैलाने वाले भगवान शिव मृत्‍यु न कि मोक्ष से हमें मुक्ति दिलाएं।|| इस मंत्र का विस्तृत रूप से अर्थ ||हम भगवान शंकर की पूजा करते हैं, जिनके तीन नेत्र हैं, जो प्रत्येक श्वास में जीवन शक्ति का संचार करते हैं, जो सम्पूर्ण जगत का पालन-पोषण अपनी शक्ति से कर रहे हैं,उनसे हमारी प्रार्थना है कि वे हमें मृत्यु के बंधनों से मुक्त कर दें, जिससे मोक्ष की प्राप्ति हो जाए.जिस प्रकार एक ककड़ी अपनी बेल में पक जाने के उपरांत उस बेल-रूपी संसार के बंधन से मुक्त हो जाती है, उसी प्रकार हम भी इस संसार-रूपी बेल में पक जाने के उपरांत जन्म-मृत्यु के बन्धनों से सदा के लिए मुक्त हो जाएं, तथा आपके चरणों की अमृतधारा का पान करते हुए शरीर को त्यागकर आप ही में लीन हो जाएं.


Om Tryambakam Yajamahe Sugandhim Pustivardhanam
Urva Rukamiva Bandhanan Mrtyor Muksiya Ma Mrtat


Word For Word Translation
Aum- is a sacred/mystical syllable in Hinduism., Tryambakam- the third-eyed one (accusative case), Yajamahe- we worship, adore, honor., Sugandhim- , sweet fragrance, fragrant (accusative case), Pusti- A well-nourished condition, thriving, prosperous, fullness of life, Vardhanam- one who nourishes, strengthens, cause to increase (in health, wealth, well-being), who gladdens, exhilarates and restores health, a good gardener, Urvarukam-iva- like the cucumber or melon (in the accusative case) or like a big peach, Bandhanan- bound down, Mrtyormuksiya – free, liberate from death, ma+amrtat- not+immortality, nectar

।। गायत्री मंत्र ।।
Gayatri Mantra

||ॐ भूर्भुवः स्वः तत्स॑वि॒तुर्वरेण्यं॒ ||
||भर्गो॑ दे॒वस्य॑धीमहि धियो॒ यो नः॑ प्रचो॒दया॑त् ||



गायत्री मंत्र के प्रत्येक शब्द की व्याख्या
ॐ = प्रणव, भूर = मनुष्य को प्राण प्रदाण करने वाला, भुवः = दुख़ों का नाश करने वाला, स्वः = सुख़ प्रदाण करने वाला, तत = वह, सवितुर = सूर्य की भांति उज्जवल, वरेण- ्यं = सबसे उत्तम, भर्गो- = कर्मों का उद्धार करने वाला, देवस्य- = प्रभु, धीमहि- = आत्म चिंतन के योग्य (ध्यान), धियो = बुद्धि, यो = जो, नः = हमारी, प्रचो- दयात् = हमें शक्ति दें (प्रार्थना)


Om Bhoor Bhuvah Svah Tat Savitur Varenyam
Bhargo Devasya Deemahi Dhiyo Yo Nah Prachodayaat


Word For Word Translation
Om: The Original sound; Bhur: the physical body; Bhuvah: the life force; Suvah: the soul/spiritual nation; Tat: God; Savitur: the Sun, Creator (source of all life); Vareñyam: adore; Bhargo: effulgence (divine light); Devasya: superior Lord; Dhīmahi: meditate; Dhiyo: the intellect; Yo: May this light; Nah: our; Prachodayāt: illumine/inspire

।। शान्ति मंत्र ।।
Shanti Mantra

सर्वेषां स्वस्ति भवतु । सर्वेषां शान्तिर्भवतु ।
सर्वेषां पूर्नं भवतु । सर्वेषां मड्गलं भवतु ॥
सर्वे भवन्तु सुखिनः। सर्वे सन्तु निरामयाः।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु। मा कश्चित् दुःख भाग्भवेत्॥



अर्थात
सभी के साथ अच्छा हो एवं सर्वस्व शांति हो। सभी सम्पूर्ण हों व हर तरफ मंगल हो
सभी जन सुखी व आरोग्य हों। हम सभी के साथ अच्छा हो व किसी को भी दुःख न देखना पड़े।


Sarveshaam Svastir Bhavatu, Sarveshaam Shaantir Bhavatu
Sarveshaam Purnam Bhavatu, Sarveshaam Mangalam Bhavatu
Sarve Bhavantu Sukhinah, Sarve Santu Niramayaah
Sarve Bhardrani Pashyantu, Maa Kadhchit Duhkhabhahg Bhavet


Meaning
May good befall all, May there be peace for all,
May all be fit for perfection, and May all experience that which is auspicious.
May all be happy. May all be healthy. May all experience what is good and
let no one suffer

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